Yuvakbharati 12th Standard HSC Maharashtra State Board chapter 5 - गुरुबानी [Latest edition] | Aster Classes

Chapter 5: गुरुबानी

Balbharati solutions for Hindi – Yuvakbharati 12th Standard HSC Maharashtra State Board chapter 5 – गुरुबानी [Latest edition]

आकलन | Q 1 | Page 25

संजाल पूर्ण कीजिए :

Solution: 

(१) मोह को त्यागना

(२) बुद्धि को श्रेष्ठ मानना

(३) प्रेमभाव जाग्रत करना

(४) सच्चे मन से गुरु से ज्ञान पाना

आकलन | Q 2 | Page 25

कृति पूर्ण कीजिए :-

Solution: 

(१) सूर्य

(२) चंद्रमा

शब्द संपदा | Q 1 | Page 25

लिखिए :

Solution: 

प्रत्यय युक्त शब्

दान

दान + ई = दानी

दया

दया + आलू = दयालु

गुण

गुण + वान = गुणवान

अंतर

अंतर + आल = अंतराल

अभिव्यक्ति | Q 1.1 | Page 25

‘गुरु बिन ज्ञान न होई’ उक्ति पर अपने विचार लिखिए ।

Solution: 

ज्ञान की कोई सीमा नहीं है। विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न प्रकार के ज्ञान की आवश्यकता होती है। यह ज्ञान हमें किसी-न किसी व्यक्ति से मिलता है। जिस व्यक्ति से हमें यह ज्ञान मिलता है, वही हमारे लिए गुरु होता है। बचपन में बच्चे का पालन-पोषण कर उसे बड़ा करके बोलने-चालने और बोली-भाषा सिखाने का काम माता करती है। उस समय वह बच्चे की गुरु होती है। बड़े होने पर बच्चे को विद्यालय में शिक्षकों से ज्ञान प्राप्त होता है। पढ़-लिखकर जीवन में पदार्पण करने पर हर व्यक्ति को किसी-न-किसी से अपने काम-काज करने का ढंग सीखना पड़ता है। इस तरह के लोग हमारे लिए गुरु के समान होते हैं। मनुष्य गुरुओं से ही सीखकर विभिन्न कलाओं में पारंगत होता है। बड़े-बड़े विद्वान, विचारक, राजनीति, समाजशास्त्री, वैज्ञानिक, अर्थशास्त्री अपने-अपने गुरुओं से ज्ञान प्राप्त करके ही महान हुए हैं। अच्छी शिक्षा देने वाला गुरु होता है।

गुरु की महिमा अपरंपार है। गुरु ही हमें गलत या सही में भेद करना सिखाते हैं। वे अपने मार्ग से भटके हुए लोगों को सही मार्ग दिखाते हैं। यह सच है कि गुरु के बिना ज्ञान नहीं होता।

अभिव्यक्ति | Q 1.2 | Page 25

‘ईश्वर भक्ति में नामस्मरण का महत्व होता है’, इस विषय पर अपना मंतव्य लिखिए।

Solution: 

ईश्वर भक्ति के अनेक मार्ग बताए गए हैं। उनमें सबसे सरल मार्ग ईश्वर का नाम स्मरण करना है। नाम स्मरण करने का कोई नियम नहीं है। भक्त जहाँ भी हो, चाहे जिस हालत में हो, ईश्वर का नाम स्मरण कर सकता है। अधिकांश लोग ईश्वर भक्ति का यही मार्ग अपनाते हैं। उठते-बैठते, आते-जाते तथा काम करते हुए नाम स्मरण किया जा सकता है। भजन – कीर्तन भी ईश्वर के नाम स्मरण का ही एक रूप है। ईश्वर भक्ति के इस मार्ग में प्रभु के गुणों का वर्णन किया जाता है। इसमें धार्मिक पूजा-स्थलों में जाने की जरूरत नहीं होती। गृहस्थ अपने घर में ईश्वर का नाम स्मरण कर उनके गुणों का बखान कर सकता है। इससे नाम स्मरण करने वालों को मानसिक शांति मिलती हैं और मन प्रसन्न होता है। कहा गया है – ‘कलियुग केवल नाम अधारा, सुमिरि-सुमिर नर उतरें पारा।’ इसमें ईश्वर भक्ति में नाम स्मरण का ही महत्त्व बताया गया है।

रसास्वादन | Q 1 | Page 25

‘गुरुनिष्ठा और भक्तिभाव से ही मानव श्रेष्ठ बनता है’ इस कथन के आधार पर कविता का रसास्वादन कीजिए ।

Solution: 

गुरु नानक का कहना है कि बिना गुरु के मनुष्य को ज्ञान नहीं मिलता। मनुष्य के अंतःकरण में अनेक प्रकार के मनोविकार होते हैं, जिनके वशीभूत होने के कारण उसे वास्तविकता के दर्शन नहीं होते। वह अहंकार में डूबा रहता है और उसमें गलत-सही का विवेक नहीं रह जाता। ये मनोविकार दूर होता है गुरु से ज्ञान प्राप्त होने पर। यदि गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा और उनमें पूरा विश्वास हो तो मनुष्य के अंतःकरण के इन विकारों को दूर होने में समय नहीं लगता। मन के विकार दूर हो जाने पर मनुष्य में सबको समान दृष्टि से देखने की भावना उत्पन्न हो जाती है। उसके लिए कोई बड़ा या छोटा अथवा ऊँच-नीच नहीं रह जाता। उसे मनुष्य में ईश्वर के दर्शन होने लगते हैं। उसके लिए ईश्वर की भक्ति भी सुगम हो जाती है। गुरु नानक ने अपने पदों में इस बात को सरल ढंग से कहा है।

इस तरह गुरु के प्रति सच्ची निष्ठा और भक्ति-भावना से मनुष्य श्रेष्ठ मानव बन जाता है ।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 1.1 | Page 26

गुरु नानक जी की रचनाओं के नाम :

Solution: 

गुरुग्रंथसाहिब आदि।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 1.2 | Page 26

गुरु नानक जी की भाषा शैली की विशेषताएँ :

Solution: 

गुरु नानक जी सहज-सरल भाषा में अपनी बात कहने में माहिर हैं। आपकी काव्य भाषा में फारसी, मुल्तानी, पंजाबी, सिंधी, खड़ी बोली और अरबी भाषा के शब्द समाए हुए हैं। आपने पद शैली में रचना की है। ‘पद’ काव्य रचना की गेय शैली है।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 1 | Page 26

निम्नलिखित वाक्यों मेंअधोरेखांकित शब्दों का वचन परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए :

सत्य का मार्ग सरल है ।

Solution: 

सत्य के मार्ग सरल हैं।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 2 | Page 26

निम्नलिखित वाक्यों मेंअधोरेखांकित शब्दों का वचन परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए :

हथकड़ियाँ लगाकर बादशाह अकबर के दरबार को ले चले।

Solution: 

हथकड़ी लगाकर बादशाह अकबर के दरबार को ले चले।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 3 | Page 26

निम्नलिखित वाक्यों मेंअधोरेखांकित शब्दों का वचन परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए :

चप्पे-चप्पे पर काटों की झाड़ियाँ हैं।

Solution: 

चप्पे-चप्पे पर काँटें की झाड़ीहै।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 4 | Page 26

निम्नलिखित वाक्यों मेंअधोरेखांकित शब्दों का वचन परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए :

सुकरात के लिए यह जहर का प्याला है।

Solution: 

सुकरात के लिए ये जहर के प्यालेहैं।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 5 | Page 26

निम्नलिखित वाक्यों मेंअधोरेखांकित शब्दों का वचन परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए :

रूढ़ि स्थिर है, परंपरा निरंतर गतिशील है।

Solution: 

रूढ़ियाँ स्थिर हैं, परंपराएँ निरंतर गतिशील हैं।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 6 | Page 26

निम्नलिखित वाक्यों मेंअधोरेखांकित शब्दों का वचन परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए :

उनकी समस्त खूबियों-खामियों के साथ स्वीकार कर अपना लें।

Solution: 

उनकी समस्त खूबी-कमी के साथ स्वीकार कर अपना लें।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 7 | Page 26

निम्नलिखित वाक्यों मेंअधोरेखांकित शब्दों का वचन परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए :

वे तो रुपये सहेजने में व्यस्त थे।

Solution: 

वह तो रुपया सहेजने में व्यस्त था।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 8 | Page 26

निम्नलिखित वाक्यों मेंअधोरेखांकित शब्दों का वचन परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए :

ओजोन विघटन के खतरे क्या-क्या हैं?

Solution: 

ओजोन विघटन काखतरा क्या है?

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 9 | Page 26

निम्नलिखित वाक्यों मेंअधोरेखांकित शब्दों का वचन परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए :

शब्द में अर्थ छिपा होता है।

Solution: 

शब्दों में अर्थ छिपेहोतेहैं।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 10 | Page 26

निम्नलिखित वाक्यों मेंअधोरेखांकित शब्दों का वचन परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए :

अभी से उसे ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए।

Solution: 

अभी से उसे ऐसे कोई कदम नहीं उठाने चाहिए।

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