सच हम नहीं; सच तुम नहीं | Aster Classes

Chapter 3: सच हम नहीं; सच तुम नहीं

Balbharati solutions for Hindi – Yuvakbharati 12th Standard HSC Maharashtra State Board chapter 3 – सच हम नहीं; सच तुम नहीं [Latest edition]

आकलन | Q 1 | Page 14

कविता की पंक्ति पूर्ण कीजिए :

(१) बेकार है मुस्कान से ढकना, ____________

(२) आदर्श नहीं हो सकती, ____________

(३) अपने हृदय का सत्य, ____________

(४) अपने नयन का नीर, ____________

Solution:

(१) बेकार है मुस्कान से ढकना, हृदयकीखिन्नता।

(२) आदर्श हो सकती नहीं, तनऔरमनकीभिन्नता।

(३) अपने हृदय का सत्य, अपने-आपहमकोखोजना।

(४) अपने नयन का नीर, अपने-आपहमकोपोंछना।

आकलन | Q 2.1 | Page 14

लिखिए :

जीवन यही है – ____________

Solution:

जीवन यही है –

(i) नत न होना।

(ii) पंथ भूलने पर भी न रुकना।

(iii) हार देखकर भी न झुकना।

(iv) मृत्यु को भी जीत लेना।

आकलन | Q 2.2 | Page 14

लिखिए :

मिलना वही है – ____________

Solution:

मिलना वही है –

जो मँझधार को मोड़ दे।

शब्द संपदा | Q 1 | Page 14

प्रत्येक शब्द केदो पर्यायवाची शब्द लिखिए :

पंथ – ____________  ____________

Solution:

पंथ – रास्ता  डगर

शब्द संपदा | Q 2 | Page 14

प्रत्येक शब्द केदो पर्यायवाची शब्द लिखिए :

काँटा – ____________  ____________

Solution:

काँटा – शूल कंटक

शब्द संपदा | Q 3 | Page 14

प्रत्येक शब्द केदो पर्यायवाची शब्द लिखिए :

फूल – ____________  ____________

Solution:

फूल – पुष्प कुसुम

शब्द संपदा | Q 4 | Page 14

प्रत्येक शब्द केदो पर्यायवाची शब्द लिखिए :

नीर – ____________  ____________

Solution:

नीर – अंबु जल

शब्द संपदा | Q 5 | Page 14

प्रत्येक शब्द केदो पर्यायवाची शब्द लिखिए :

नयन – ____________  ____________

Solution:

नयन – चक्षु आँख

अभिव्यक्त | Q 1 | Page 14

‘जीवन निरंतर चलते रहने का नाम है’, इस विचार की सार्थकता स्पष्ट कीजिए ।

Solution:

जीवन का उद्देश्य निरंतर आगे-ही-आगे बढ़ते रहना है। जीवन में ठहराव आने को मृत्यु की संज्ञा दी जाती है। अनेक महापुरुषों ने अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए जीवन भर संघर्ष किया है और उनका नाम अमर हो गया है। जीवन का मार्ग आसान नहीं है। उस पर पग-पग पर कठिनाइयाँ आती रहती हैं। इन कठिनाइयों से उसे जूझना पड़ता है। उसमें हार भी होती है और जीत भी होती है। असफलताओं से मनुष्य को घबराना नहीं चाहिए। बल्कि उनका दृढ़तापूर्वक सामना करके उसमें से अपना मार्ग प्रशस्त करना और निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए। एक दिन मंजिल अवश्य मिलेगी। जीवन संघर्ष कभी न खत्म होने वाला संग्राम है। इसका सामना करने का एकमात्र मार्ग है निरंतर चलते रहना और हर स्थिति में संघर्ष जारी रखना।

अभिव्यक्त | Q 2 | Page 14

‘संघर्ष करने वाला ही जीवन का लक्ष्य प्राप्त करता है’, इस विषय पर अपने विचार प्रकट कीजिए

Solution:

दुनिया में दो प्रकार के मनुष्य होते हैं। एक वे जो सामान्य रूप से चलनेवाली जिंदगी जीना पसंद करते हैं और आगे बढ़ने के लिए किए जानेवाले उठा-पटक को पसंद नहीं करते। दूसरे तरह के वे लोग होते हैं, जो अपना लक्ष्य निर्धारित कर लेते हैं और उसे प्राप्त करने के लिए संघर्ष का रास्ता चुनते हैं। ऐसे लोगों का जीवन आसान नहीं होता। इन्हें पग-पग पर विभिन्न रुकावटों का सामना करना पड़ता है। पर ऐसे लोग इन रुकावटों से डरते नहीं, बल्कि हँसते-हँसते इनका सामना करते हैं। सामना करने में अनेक बार असफलता भी इनके हाथ लगती है। पर ये इससे हताश नहीं होते। ये फिर अपनी गलतियों को सुधारते हैं और नए सिरे से संघर्ष करने में जुट जाते हैं। परिस्थितियाँ कैसी भी हों, वे न झुकते हैं और न हताश होते हैं। उनके सामने सदा उनका लक्ष्य होता है। उसे प्राप्त करने के लिए वे निरंतर संघर्ष करते रहते हैं। ऐसे लोग अपनी निष्ठा और लगन के बल पर एक-न-एक दिन अवश्य सफल हो जाते हैं। वे संघर्ष के बल पर अपने जीवन का लक्ष्य प्राप्त करके रहते हैं।

रसास्वादन | Q 1 | Page 15

‘आँसुओं को पोंछकर अपनी क्षमता ओं को पहचानना ही जीवन है’, इस सच्चाई को समझाते हुए कविता का रसास्वादन कीजिए ।

Solution:

डॉ. जगदीश गुप्त द्वारा लिखित कविता ‘सच हम नहीं, सच तुम नहीं में जीवन में निरंतर संघर्ष करते रहने का आह्वान किया गया है।

कवि पानी-सी बहने वाली सीधी-सादी जिंदगी का विरोध करते हुए संघर्षपूर्ण जीवन जीने की बात करते हैं। वे कहते हैं, जो जहाँ भी हो, उसे संघर्ष करते रहना चाहिए।

संघर्ष में मिली असफलता से निराश होने की आवश्यकता नहीं है। ऐसी हालत में हमें किसी के सहयोग की आशा नहीं करनी। हमें अपने आप में खुद हिम्मत लानी होगी और अपनी क्षमता को पहचान कर नए सिरे से संघर्ष करना होगा। मन में यह विश्वास रखकर काम करना होगा कि हर राही को भटकने के बाद दिशा मिलती ही है और उसका प्रयास व्यर्थ नहीं जाएगा। उसे भी दिशा मिलकर रहेगी।

कवि ने सीधे-सादे शब्दों में प्रभावशाली ढंग से अपनी बात कही है। अपनी बात कहने के लिए उन्होंने ‘अपने नयन का नीर पोंछने’ शब्द समूह के द्वारा हताशा से अपने आपको उबार कर स्वयं में नई शक्ति पैदा करने तथा ‘आकाश सुख देगा नहीं, धरती पसीजी है नहीं से यह कहने का प्रयास किया है कि भगवान तुम्हारी सहायता के लिए नहीं आने वाले हैं और धरती के लोग तुम्हारे दुख से द्रवित नहीं होने वाले हैं। इसलिए तुम स्वयं अपने आप को सांत्वना दो और नए जोश के साथ आगे बढ़ो। तुम अपने लक्ष्य पर पहुँचने में अवश्य कामयाब होंगे।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 1 | Page 15

जानकारी दीजिए :

‘नयी कविता’ के अन्य कवियों के नाम – ____________

Solution:

‘नयी कविता’ के अन्य कवियों के नाम – रामस्वरूप चतुर्वेदी, विजयदेव साही

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 2 | Page 15

जानकारी दीजिए :

कवि डॉ. जगदीश गुप्त की प्रमुख साहित्यिक कृतियों के नाम –  ____________

Solution:

कवि डॉ. जगदीश गुप्त की प्रमुख साहित्यिक कृतियों के नाम – ‘नाँव के पाँव, शब्द दंश, हिम विद्ध, गोपा-गौतम’ (काव्य संग्रह), ‘शंबूक’ (खंडकाव्य), ‘भारतीय कला के पदचिह्न, नयी कविता : स्वरूप और समस्याएँ, केशवदास’ (आलोचना) तथा ‘नयी कविता’ (पत्रिका)।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 1 | Page 15

निम्नलिखित वाक्यों में अधोरेखांकित शब्दों का लिंग परिवर्तन कर वाक्य फिर से लिखिए :

बहुत चेष्टा करने पर भी हरिण न आया।

Solution:

बहुत चेष्टा करने पर भी हरिणी न आई।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 2 | Page 15

निम्नलिखित वाक्यों में अधोरेखांकित शब्दों का लिंग परिवर्तन कर वाक्य फिर से लिखिए :

सिद्धहस्त लेखिका बनना ही उसका एकमात्र सपना था।

Solution:

सिद्धहस्त लेखक बनना ही उनका एकमात्र सपना था।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 3 | Page 15

निम्नलिखित वाक्यों में अधोरेखांकित शब्दों का लिंग परिवर्तन कर वाक्य फिर से लिखिए :

तुम एक समझदार लड़की हो ।

Solution:

तुम एक समझदार लड़के हो।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 4 | Page 15

निम्नलिखित वाक्यों में अधोरेखांकित शब्दों का लिंग परिवर्तन कर वाक्य फिर से लिखिए :

मैं पहली बार वृद्धाश्रम में मौसी से मिलने आया था।

Solution:

मैं पहली बार वृद्धाश्रम में मौसा से मिलने आया था।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 5 | Page 15

निम्नलिखित वाक्यों में अधोरेखांकित शब्दों का लिंग परिवर्तन कर वाक्य फिर से लिखिए :

तुम्हारे जैसा पुत्र भगवान सब को दे।

Solution:

तुम्हारी जैसी पुत्री भगवान सब को दे।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 6 | Page 15

निम्नलिखित वाक्यों में अधोरेखांकित शब्दों का लिंग परिवर्तन कर वाक्य फिर से लिखिए :

साधु की विद्वत्ता की धाक दूर-दूर तक फैल गई थी।

Solution:

साध्वी की विद्वत्ता की धाक दूर-दूर तक फैल गई थी।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 7 | Page 15

निम्नलिखित वाक्यों में अधोरेखांकित शब्दों का लिंग परिवर्तन कर वाक्य फिर से लिखिए :

बूढ़े मर गए।

Solution:

बुढ़ियाँ मर गईं।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 8 | Page 15

निम्नलिखित वाक्यों में अधोरेखांकित शब्दों का लिंग परिवर्तन कर वाक्य फिर से लिखिए :

वह एक दस वर्ष का बच्चा छोड़ा गया ।

Solution:

वह एक दस वर्ष की बच्ची छोड़ी गई।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 9 | Page 15

निम्नलिखित वाक्यों में अधोरेखांकित शब्दों का लिंग परिवर्तन कर वाक्य फिर से लिखिए :

तुम्हारा मौसेरा भाई माफी माँगने पहुँचा था।

Solution:

तुम्हारीमौसेरीबहन माफी माँगने पहुँचीथी।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 10 | Page 15

निम्नलिखित वाक्यों में अधोरेखांकित शब्दों का लिंग परिवर्तन कर वाक्य फिर से लिखिए :

एक अच्छी सहेली के नाते तुम उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि का अध्ययन करो।

Solution:

एक अच्छेमित्र के नाते तुम उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि का अध्ययन करो।

Tags: Chapter 3: सच हम नहीं; सच तुम नहीं

आकलन, शब्द, संपदा, अभिव्यक्त, रसास्वादन, साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान,

Balbharati solutions for Hindi – Yuvakbharati 12th Standard HSC Maharashtra State Board chapter 3 – सच हम नहीं; सच तुम नहीं

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